दान मामले में अब सूचना लीक की जांच
अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान की रकम में कथित गड़बड़ी की जांच के बीच अब संवेदनशील जानकारी के बाहर पहुंचने का मामला भी जांच के दायरे में आया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने मामले से जुड़े वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों से पूछताछ की है। दो कर्मचारियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस एक ऐसे व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिस पर मंदिर से जुड़ी संवेदनशील जानकारी एक प्रमुख राजनीतिक नेता तक पहुंचाने का संदेह है।
लखनऊ जाने की बात सामने आई
जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संबंधित कर्मचारी एक प्रमुख राजनीतिक व्यक्ति के संपर्क में था और उससे मिलने के लिए लखनऊ भी गया था।
पुलिस कथित संपर्क, बातचीत और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति ने जुलाई में अपने फेसबुक अकाउंट से कई पोस्ट डिलीट कर दी थीं और 28 जुलाई के बाद कोई नई पोस्ट नहीं की।
डिलीट की गई पोस्ट और अन्य डिजिटल जानकारी हासिल करने के लिए साइबर सेल की मदद ली जा रही है।
कर्मचारियों के बयान भी दर्ज
जांच एजेंसियों ने मंदिर में दान की गिनती और उससे जुड़े काम में शामिल SBI कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए हैं। दो कर्मचारियों से मिली जानकारी को जांच में अहम माना जा रहा है।
हालांकि, किसी कर्मचारी द्वारा किसी राजनीतिक नेता को जानकारी लीक करने या कथित मुलाकात के पीछे की मंशा को लेकर अभी आधिकारिक तौर पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
105 घटनाएं CCTV में सामने आईं
इस बीच, राम मंदिर दान मामले की मुख्य जांच में CCTV फुटेज से कथित तौर पर नकदी को अनधिकृत तरीके से हटाने या छिपाने की 105 घटनाएं सामने आने की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी गई है। जांच में CCTV के अलावा वित्तीय रिकॉर्ड, फोरेंसिक जांच और बरामदगी को भी शामिल किया गया है।
मामले में दान की गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने उनके खिलाफ चोरी, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं में कार्रवाई की है।
25 सितंबर तक दाखिल होगी चार्जशीट
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया है कि SIT की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और चार्जशीट 25 सितंबर 2026 तक दाखिल की जाएगी। यह तारीख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली गिरफ्तारी से 90 दिन की अवधि पूरी हो रही है।
जांच के दौरान अब तक 173 गवाहों के बयान दर्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। मामले में आगे की जांच की गुंजाइश बनी हुई है।
जरूरी सूचना: लखनऊ कनेक्शन, कथित राजनीतिक संपर्क और सूचना लीक से जुड़ी जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों और सूत्रों के दावों पर आधारित है। संबंधित व्यक्ति या राजनीतिक नेता की भूमिका को लेकर जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।