UN में रुबियो ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर उठाए सवाल
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बड़े संघर्षों से प्रभावी तरीके से निपटने में सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा कि कई देशों के नेताओं के बीच इस बात को लेकर सहमति दिखाई देती है कि यह व्यवस्था अपने मूल उद्देश्य से आगे बढ़ गई है।
रुबियो के मुताबिक, मौजूदा सिस्टम कई अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में अपेक्षित भूमिका नहीं निभा पा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय तंत्र प्रभावी तरीके से काम नहीं करता, तो देश अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेने लगते हैं।
भारत-पाकिस्तान का भी किया जिक्र
रुबियो ने संभावित भारत-पाकिस्तान संघर्ष को भी उदाहरण के तौर पर सामने रखा। उन्होंने कहा कि एक प्रभावी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था ऐसी परिस्थितियों से निपटने में सक्षम होनी चाहिए, लेकिन फिलहाल उन्हें ऐसा तंत्र पर्याप्त रूप से काम करता हुआ नजर नहीं आता।
हालांकि, रुबियो के बयान में भारत और पाकिस्तान के बीच किसी नए युद्ध या तत्काल संघर्ष की घोषणा नहीं थी। उन्होंने दोनों देशों के बीच संभावित संघर्ष को दुनिया में मौजूद उन परिस्थितियों के उदाहरण के तौर पर गिनाया, जिनसे निपटने की अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की क्षमता पर वे सवाल उठा रहे थे।
UN की क्षमता पर भी टिप्पणी
रुबियो ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की उपयोगिता को मानता है और संयुक्त राष्ट्र में काफी संभावनाएं हैं, लेकिन उनके मुताबिक संस्था अपनी क्षमता के अनुरूप काम नहीं कर पा रही है।
उन्होंने थाईलैंड-कंबोडिया, सूडान, डीआर कांगो और रवांडा जैसे अन्य संघर्षों का भी संदर्भ दिया और कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तंत्र इन संकटों को प्रभावी ढंग से सुलझाने में कठिनाई का सामना कर रहा है।
अमेरिका अपने राष्ट्रीय हित को देगा प्राथमिकता
रुबियो ने यह भी कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था प्रभावी तरीके से काम नहीं करती, तो देश अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने अमेरिकी विदेश नीति के संदर्भ में स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन अपने राष्ट्रीय हितों को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से ऊपर रखेगा।
रुबियो की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में कई युद्धों और अंतरराष्ट्रीय संकटों के बीच बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका और उनकी प्रभावशीलता पर चर्चा हो रही है।
नोट: भारत-पाकिस्तान का उल्लेख रुबियो के बयान में एक संभावित संघर्ष के उदाहरण के रूप में हुआ है। इसे भारत-पाकिस्तान के बीच नए संघर्ष की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।