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शेयर बाजार में ट्रिपल झटका: Sensex 1,200 अंक से ज्यादा टूटा, जानिए गिरावट की 3 बड़ी वजह

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। Sensex करीब 1,248 अंक और Nifty 384 अंक गिरकर बंद हुए। बढ़ते कच्चे तेल के दाम, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और इंश्योरेंस सेक्टर के नए प्रस्तावों से वित्तीय शेयरों पर दबाव बाजार की गिरावट की प्रमुख वजहों में रहा।
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Sensex 1,200 से ज्यादा अंक गिरा

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के अंत में Sensex 73,580.54 पर बंद हुआ और इसमें 1,247.71 अंक यानी 1.67% की गिरावट रही।

वहीं Nifty 50 23,063.10 पर बंद हुआ। इसमें 383.70 अंक यानी 1.64% की गिरावट दर्ज की गई। दोनों प्रमुख इंडेक्स तीन महीने के निचले स्तर के आसपास पहुंच गए।

पहली बड़ी वजह- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से आया। कुछ ही समय पहले 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा क्रूड दोबारा 100 डॉलर के ऊपर पहुंच गया।

XM.com के एशिया-पैसिफिक चीफ स्ट्रैटेजिस्ट Peter McGuire ने NDTV Profit से कहा कि कच्चे तेल की कीमत में यह तेजी काफी तेज रही है। उनके मुताबिक, निकट अवधि में 110 डॉलर प्रति बैरल का स्तर भी संभव है।

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा क्रूड महंगाई और आयात बिल को लेकर चिंता बढ़ा सकता है, जिसका असर बाजार की धारणा पर पड़ता है।

दूसरी वजह- इंश्योरेंस सेक्टर के प्रस्ताव से Financial Stocks पर दबाव

गुरुवार की गिरावट में वित्तीय और इंश्योरेंस शेयरों की बिकवाली भी बड़ी वजह रही।

IRDAI के प्रस्तावित बदलावों में इंश्योरेंस एजेंटों और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े कमीशन नियमों में बदलाव की बात है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्ताव में कमीशन को उत्पाद की जटिलता से जोड़ने और लाइफ इंश्योरेंस में कमीशन भुगतान को केवल शुरुआती अवधि तक सीमित रखने के बजाय लंबी अवधि में फैलाने जैसे बदलाव शामिल हैं।

इन प्रस्तावों की खबर के बाद इंश्योरेंस और वित्तीय शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।

तीसरी वजह- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ग्लोबल दबाव

बाजार पर अमेरिकी Treasury yields में तेजी का भी दबाव रहा। US 10-year Treasury yield करीब 5.11% तक पहुंच गई, जिससे वैश्विक इक्विटी बाजारों पर दबाव बढ़ा।

Manishi Raychaudhuri ने इसे उभरते बाजारों के लिए एक तरह का “triple whammy” बताया। उनके मुताबिक, ऊंची अमेरिकी यील्ड, कमजोर होती मुद्राओं से आने वाली imported inflation और डॉलर आधारित assets की ओर capital flows बाजारों के लिए चुनौती बन रहे हैं।

क्या अभी गिरावट में खरीदारी करनी चाहिए?

यहां बाजार विशेषज्ञों की राय सावधानी वाली है। Peter McGuire ने मौजूदा स्थिति में गिरावट को तुरंत खरीदने की तुलना “catching a falling knife” से की।

वहीं Manishi Raychaudhuri ने कहा कि वह भारतीय शेयरों पर ज्यादा सकारात्मक रुख अपनाने से पहले अमेरिका-ईरान स्थिति में किसी breakthrough के संकेत देखना चाहेंगे। ये बाजार विशेषज्ञों के विचार हैं, निवेश की गारंटी या व्यक्तिगत निवेश सलाह नहीं।

निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी

गुरुवार की गिरावट के दौरान BSE-listed कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹3.93 लाख करोड़ कम हुआ। सभी 16 प्रमुख Nifty sectoral indices गिरावट के साथ बंद हुए।

बाजार में आगे कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति और IRDAI के प्रस्तावों पर निवेशकों की नजर बनी रह सकती है।

⚠️ जरूरी सूचना: यह खबर बाजार की स्थिति और विशेषज्ञों के सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिम के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता के अनुसार स्वतंत्र सलाह लें।

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