क्या है पूरा मामला?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जून में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान दलित छात्र कार्यकर्ता के पिता के साथ कथित मारपीट के मामले में आरोपी स्वातंत्र्य भारद्वाज को मंगलवार को अदालत से अंतरिम राहत मिली। पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललर ने उन्हें तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी।
भारद्वाज को सितंबर की शुरुआत में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से दिल्ली पुलिस ने पकड़ा था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई उस मामले में हुई जिसमें प्रदर्शन के दौरान संजय आजाद पर हमला करने का आरोप है।
सोशल मीडिया और पॉडकास्ट के बाद बढ़ा विवाद
मामले ने उस समय ज्यादा तूल पकड़ा जब एक पॉडकास्ट में भारद्वाज की कथित टिप्पणियां सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने हमले को लेकर सिर फोड़ने जैसी बात कही थी। इसके बाद CJP कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं ने उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज कर दी।
दिल्ली पुलिस ने बाद में मामले में SC/ST एक्ट और आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराएं भी जोड़ीं। एक अलग POCSO मामला दर्ज किए जाने की बात भी रिपोर्टों में सामने आई है।
कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने अंतरिम जमानत देते हुए कहा कि मामले का फैसला सोशल मीडिया पर चल रही बहस के आधार पर नहीं, बल्कि अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों के आधार पर होगा। कोर्ट ने भारद्वाज के आचरण पर नजर रखने की बात कही और इसी आधार पर तीन सप्ताह की अंतरिम राहत दी।
भारद्वाज की ओर से सुनवाई के दौरान यह भी दावा किया गया कि घटना में उन्होंने आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी और मामला राजनीतिक दबाव में आगे बढ़ाया गया। यह उनके पक्ष का दावा है, जिस पर अदालत में आगे सुनवाई होनी है।
अब आगे क्या होगा?
तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत खत्म होने के बाद अदालत भारद्वाज की नियमित जमानत की याचिका पर आगे विचार करेगी। इस दौरान उनके आचरण और मामले की जांच की प्रगति भी महत्वपूर्ण होगी।